“व्यवस्था परिवर्तन की प्रयोगशाला बनेगा तिरहुतीपुर”

श्री के.एन. गोविन्दाचार्य का व्यक्तित्व ऐसा है कि उन्हें एक साथ हम राजनेता, समाजसेवी, संत, विचारक और मनीषी जैसे कई विशेषण दे सकते हैं। 77 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता चकित कर देती है। देश भर में सैकड़ों ऐसे व्यक्ति, संस्थान और अभियान हैं जो उनके मार्गदर्शन में काम करते हैं। गत वर्ष उन्होंने वाराणसी के पास एक गुमनाम से गांव को अपना गांव बनाने का फैसला किया। इस निर्णय से जुड़े तमाम पहलुओं पर संवाद मीडिया की ओर से श्री विवेक त्यागी ने उनसे लंबी बातचीत की। 11 मई, 2021 को हुई इस बातचीत के संपादित अंश यहां आपके लिए प्रस्तुत हैं।

मिशन तिरहुतीपुर क्या है?

संक्षेप में कहें तो मिशन तिरहुतीपुर एक ऐसी नई व्यवस्था की तलाश है जिसमें भारत सहित पूरी दुनिया समृद्धि और संस्कृति दोनों के साथ सुखपूर्वक जीवनयापन कर सके। एक बात तय है कि मौजूदा व्यवस्था को पारंपरिक तरीकों से चुनौती देना तो दूर एक छोटी सी खरोंच भी देना संभव नहीं है। इसके लिए तो नए लड़ाके, नए तरीके और नए औजार चाहिए जो हमें गांवों में ही मिल सकते हैं। आने वाला युग ग्रामयुग होगा जिसकी अभिव्यक्ति विकेन्द्रीकरण, विविधीकरण, बाजारमुक्ति और अंततः प्रकृति केन्द्रित विकास और व्यवस्था परिवर्तन के रूप में होगी। मिशन तिरहुतीपुर इसी दिशा में एक छोटी सी पहल है।

क्या तिरहुतीपुर गांव को आपने गोद लिया है ?

गांव हमारी सभ्यता-संस्कृति और हमारे देश की बुनियाद हैं। चाहे एक ही गांव क्यों न हो, वह अपने आप में इतना विराट होता है कि उसे कोई गोद नहीं ले सकता। हां उसकी गोद में जाकर बहुत कुछ सीखा जरूर जा सकता है। मैं अभी वही करने का प्रयास कर रहा हूं।

19 अप्रैल, 2020 के दिन आपने अपने फेसबुक पेज पर तिरहुतीपुर गांव को अपना गांव मानकर काम करने की घोषणा की थी। लोग जानना चाहते हैं कि आपने तिरहुतीपुर गांव को ही क्यों चुना ?

हमारे एक पुराने कार्यकर्ता हैं विमल कुमार सिंह। पिछले 17 वर्षों से वे मेरे साथ जुड़कर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय पक्ष नामक हमारी पत्रिका का दस वर्षों तक सफल संपादन किया। भारत विकास संगम में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। “मेरा जिला मेरी दुनिया और मेरा गांव मेरा देश” के विचार में उनकी गहरी आस्था है। गत वर्ष जब कोरोना संकट की शुरूआत हुई तो उन्होंने अपने गांव आकर स्थायी रूप से रहने का निमंत्रण दिया था। उनके प्रस्ताव को मैंने अपनी सहमति दी थी।  तिरहुतीपुर को चुनने का तात्कालिक कारण यही था। हालांकि इस मुद्दे पर हमारी काफी लंबे समय से बात चल रही थी। गांव में स्थायी रूप से रहने के बारे मे मेरी पहले से ही सैद्धांतिक सहमति थी।

क्या आप इस गांव में नियमित रहने लगे हैं ?

देशभर में अलग-अलग स्थानों पर निरंतर प्रवास के कारण एक जगह टिक कर रहना अभी संभव नहीं हो पाता। लेकिन जब भी समय मिलता है, गांव जाने का प्रयास करता हूं। मैं कहीं भी रहूं, मेरा केन्द्र अब तिरहुतीपुर ही रहेगा। आजकल पत्राचार के लिए मैं यहीं का पता देता हूं जो इस प्रकार है- के.एन. गोविन्दाचार्य, ग्राम तिरहुतीपुर, पोस्ट सोहौली, जिला आजमगढ़, उ.प्र. पिन- 276301

गांव में आप के रहने की क्या व्यवस्था है ? 

अभी तो विमल जी के घर पर ही रुकता हूं। लेकिन कोशिश कर रहा हूं कि गांव में रहने की कोई स्वतंत्र व्यवस्था हो जाए। ऐसा होने पर अपने अतिथियों को भी बुला पाऊंगा जो अभी संकोच वश नहीं कर पाता हूं।

तिरहुतीपुर के लिए आप क्या करने वाले हैं ?

मेरी दृष्टि में तिरहुतीपुर गांव देश के लाखों गांवों का एक प्रतिनिधि रूप है। यहां मेरी प्राथमिकता में वे कार्य होंगे जिनकी प्रासंगिकता देश के सभी गांवों के लिए हो। इस गांव विशेष को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया करा देना या यहां के निवासियों को कुछ तात्कालिक लाभ पहुंचा देना मेरा मूल उद्देश्य नहीं है। हालांकि ये सब बातें भी सहज रूप से होती चलेंगी।

गांव में आपने जो पहल की है, उसे लेकर क्या कोई विस्तृत रोड मैप बना है ?

जी हां, बना है। विमल जी और अन्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक विस्तृत योजना बनाई है जिसे नाम दिया है – मिशन तिरहुतीपुर। हम चाहते हैं कि तिरहुतीपुर को प्रकृति केन्द्रित विकास के एक अनौपचारिक विश्वविद्यालय की तरह विकसित किया जाए। यहां विकास का एक ऐसा रास्ता तलाशा जाए जो आस-पास के गांवों से होते हुए पूरे देश में सहज ही फैल जाए। इसे हम व्यवस्था परिवर्तन की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। अगर तिरहुतीपुर आदर्श गांव बन जाए और आस-पास के गांव पहले की तरह ही बदहाल बने रहे तो इसे मैं मिशन की असफलता मानूंगा। पिछले दो दशकों से मैं जिस व्यवस्था परिवर्तन और प्रकृति केन्द्रित विकास की बात करता आया हूं, मिशन तिरहुतीपुर उसी को प्राप्त करने का व्यावहारिक रोड मैप है।

आप उम्र के जिस दौर में हैं, उसे देखते हुए इतने व्यापक उद्देश्य को सामने रखकर योजना बनाना और उस दिशा में पहल करना कितना व्यवहारिक है ?

कुछ काम ऐसे होते हैं जिसे करने में बहुत सारे लोग और कई पीढि़यां लगती हैं। व्यवस्था परिवर्तन और प्रकृति केन्द्रित विकास ऐसा ही एक काम है। पिछले 20 वर्षों से इस ध्येय को लेकर मेरे साथ कई कर्मठ कार्यकर्ता लगे हैं। मेरे बाद वे इस काम को आगे बढ़ाएंगे। उनके जीवन में यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वे यह जिम्मेदारी अपने से आगे की पीढ़ी को सौंप जाएंगे, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है। लक्ष्य कब मिलेगा, यह हमें पता नहीं, लेकिन अपने लक्ष्य की ओर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ते रहने का मेरा और मेरे साथियों का निश्चय पक्का है। हम धीरे ही सही, लेकिन अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि आप अपने किसी निर्णय पर टिकते नहीं हैं। आपने कई अभियानों को शुरू किया और उन्हें बीच में ही छोड़ दिया। ऐसा क्यों ?  

जब संसाधन सीमित और लक्ष्य अत्यंत व्यापक हों तो हर मोर्चे पर लगातार लड़ते रहना न तो संभव है और न ही अभीष्ट। ऐसे में अपने चुने हुए मोर्चे पर लड़ना और परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए मोर्चे को बदलते रहना अधिक लाभप्रद होता है। कई बार जो होता है वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं। मीडिया के चश्मे से आपको पूरी और सही-सही तस्वीर कभी दिखाई नहीं देगी। तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद हमने अपने सभी प्रमुख अभियानों को गतिमान रखा है। किसी को बीच में छोड़ा नहीं है।

मिशन तिरहुतीपुर के मोर्चे पर आपकी सक्रियता कब तक रहेगी ? 

जहां तक तिरहुतीपुर गांव से व्यक्तिगत संबंध की बात है, वह हमेशा मेरा अपना गांव रहेगा। वहां आना-जाना कभी बंद नहीं होगा। लेकिन अगर इससे जुड़े मिशन की बात करें तो उसमें मेरी सहभागिता सशर्त है। किसी अभियान में मैं तभी तक सक्रिय रहता हूं, जब तक उससे जुड़े प्रमुख कार्यकर्ता अपने कार्य के प्रति निष्ठावान रहते हैं। जब तक ऐसा रहेगा, मैं अपनी पूरी ताकत के साथ मिशन तिरहुतीपुर के लिए काम करता रहूंगा।

इस मिशन के कार्यकर्ताओं के बारे में आपकी क्या राय है ? 

इस मिशन में विमल जी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मिशन को सफल बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली का अपना मीडिया का काम-धाम छोड़ गांव में ही रहने का फैसला किया है। पिछले 6 महीने से वे मिशन तिरहुतीपुर के हर छोटे-बड़े पहलू पर काम कर रहे हैं। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर औरंगाबाद, बिहार के कमलनयन भी लगे हुए हैं। वो भी पहले दिल्ली में मीडिया के क्षेत्र में काम कर रहे थे, लेकिन अब अपना करियर और घर-बार छोड़ तिरहुतीपुर में डटे हैं। इसके अलावा बहुत से कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर रहते हुए मिशन के लिए काम कर रहे हैं। इन सभी के समर्पण से मैं अभिभूत हूं। इनके साथ मिलकर काम करने में मुझे खुशी होती है। 

आपने अपने लिए क्या भूमिका तय की है ? 

मिशन के काम में देश भर की सज्जन शक्तियों को जोड़ना और इस प्रयोग के बारे में लोगों को बताना, समझाना मेरा मुख्य काम है। वैचारिक और रणनीतिक धरातल पर मिशन अपनी प्राथमिकताओं को ठीक-ठीक से तय करे, इसमें भी मैं अपनी भूमिका देखता हूं। इसके अलावा मिशन के कार्यकर्ता मेरे लिए जो भी काम तय करते हैं, उसे करने के लिए मैं सदैव तत्पर रहता हूं।

क्या आपने तिरहुतीपुर में काम करने के लिए कोई एन.जी.ओ. या संगठन बनाया है? यहां का काम किस बैनर तले होगा ?

मिशन तिरहुतीपुर किसी एक एन.जी.ओ. या संगठन का काम नहीं है। मेरी इच्छा है कि देश भर के तमाम संगठन और व्यक्ति जिनकी ग्रामीण विकास में रुचि है, वे यहां आएं और अपने-अपने बैनर तले काम करते हुए हमारी मदद करें। हां, इन सबके संयोजन और समन्वय की दृष्टि से “सनातन किष्किंधा मिशन” को जिम्मेदारी दी गई है। तिरहुतीपुर में काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम मुख्यतः सनातन किष्किंधा मिशन द्वारा ही किया जाएगा।

क्या आप लाभ आधारित उद्यमों की भी कोई भूमिका देखते हैं ?

हां। मिशन की सफलता मे सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ लाभ आधारित व्यवसायिक उपक्रमों की भी बराबर की भूमिका होगी। शुभ लाभ की इच्छा के साथ गांव में निवेश बढ़े, यह सभी के लिए हितकर होगा।

तिरहुतीपुर को अपनाए हुए आपको एक साल से अधिक हो गए हैं। अभी तक वहां जमीनी स्तर पर क्या काम हुआ है ?

कोरोना की पहली लहर के बाद जब लाकडाउन हटा तो मैं 26 अक्टूबर, 2020 को गांव गया। उसके बाद भी कई बार जाना हुआ। विमल और कमल वहां लगातार रह कर काम कर रहे हैं। उनका पूरा ध्यान अभी बच्चों की शिक्षा और संस्कार पर है। इसका असर भी हुआ है। बच्चे और उनके अभिभावक शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूक हुए हैं। सबसे बड़ी बात है कि महिलाओं और विशेष रूप से बच्चियों में एक नए उत्साह का संचार हुआ है। जो बच्चियां पहले घर से निकलने में भी संकोच करती थीं, वे अब कई प्रकार की गतिविधियों में खुलकर हिस्सा लेती हैं। यहां तक कि सुबह-सुबह उठकर दौड़ने में भी उन्हें अब संकोच नहीं होता है। गांव में मिशन की विभिन्न गतिविधियों के लिए एक एकड़ जमीन का प्रबंध किया गया है। आगे चलकर यहां कुछ निर्माण कार्य भी किया जाएगा। अभी इस जमीन का इस्तेमाल बच्चे खेल के मैदान के रूप में करते हैं। मिशन की गतिविधियों की ताजा जानकारी और उससे जुड़ी सभी प्रमुख अपडेट्स को आप स्वयं gramyug.com वेबसाइट पर जा कर देख सकते हैं।

मिशन में आगे चलकर किस तरह के काम किए जाएंगे ?

मिशन के अंतर्गत कुल 9 आयामों पर काम किया जाएगा। ये हैं – मीडिया, जुटान, आधारभूत सुविधाएं, संगठन, शिक्षा, कृषि, गैर कृषि उत्पादन, व्यापार और सेवा क्षेत्र। इन सभी 9 आयामों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इन्हें मिलाकर एक ऐसा माडल विकसित किया जाएगा जो किसी भी गांव के समग्र विकास में कारगर हो। हालांकि इन सभी 9 आयामों पर एक साथ काम नहीं किया जाएगा। उनके क्रियान्वयन का एक खास क्रम निर्धारित किया गया है और उसी अनुसार काम चल रहा है।

मिशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

हमें गांव के स्तर पर जल्दी से जल्दी एक ऐसा माडल विकसित करना है जो आर्थिक रूप से न केवल अपना खर्च उठाने में सक्षम हो बल्कि आगे चलकर मिशन के विस्तार में भी योगदान दे। इसके लिए हमें सामाजिक सरोकार और व्यवसायिक दक्षता, दोनों में एक संतुलन साधना होगा। यही मिशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

कोई यदि इस मिशन से और आपसे जुड़कर काम करना चाहे तो क्या करे?

जो भी मेरे साथ जुड़कर इस मिशन के लिए काम करना चाहते हैं, उनसे मेरा निवेदन है कि पहले वे gramyug.com वेबसाइट पर जाएं और अपना मोबाईल, ईमेल आदि हमें उपलब्ध कराएं। वहां उन्हें कुछ ऐसे काम बताए जाएंगे जो वे अपने गांव और शहर में रहते हुए आसानी से कर सकते हैं। इस दौरान हमारा एक-दूसरे से संपर्क बना रहेगा। धीरे-धीरे हमारे बीच एक रिश्ता विकसित होगा। इसी रिश्ते की बुनियाद पर आगे चलकर कुछ बड़े और महत्वपूर्ण काम भी सहज रूप से होते चलेंगे। मिशन के कार्यक्षेत्र में गुणात्मक वृद्धि का यही एक रास्ता है।

2 thoughts on ““व्यवस्था परिवर्तन की प्रयोगशाला बनेगा तिरहुतीपुर””

  1. Vishwas kumar tiwari

    ग्राम युग अर्थात ग्राम स्वराज्य की स्थापना ,ग्राम को लूट का केन्द्र न बनने देना , हम ग्राम पंचायत को चुनाव.मुक्त बनाना.होगा।

  2. Ajay kumar Singh

    हर गांव के मुखिया चुनाव में 60 से 70 लाख ख़र्च करते है और गांव का विकास नही हो पाता है उसी गांव में भी मेरा गांव चाँद है जो बिहार के कैमूर जिला में है इसको परिवर्तन करना है हम आप के साथ है।

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