विचार

ग्रामयुग- क्या, क्यों और कैसे ?

मारी इच्छा है कि देश मे ग्रामयुग आए। एक ऐसा युग जहां गांव शहरों के पिछलग्गू नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्वतंत्र वाहक बनें। उनके बीच शोषक-शोषित या छोटे-बड़े का नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक होने का रिश्ता बने। मोटे तौर पर हम ग्रामयुग को

गांव में रहने वाला भला “सिटिजन” कैसे हो सकता है?

भारतीय लोकतंत्र में हर उस व्यक्ति को जिसे इसमें हिस्सेदार बनाया गया है, क्या कहा जाए? जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए तो आज भी गांवों में रहने वालों की संख्या अधिक है। शहरों में जो लोग रह रहे हैं, उसमें भी अधिसंख्यक किसी न किसी गांव से ताल्लुक रखते हैं।

मिशन तिरहुतीपुर क्या है ?

संक्षेप में कहें तो मिशन तिरहुतीपुर एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश है जिसमें भारत सहित पूरी दुनिया समृद्धि और संस्कृति दोनों के साथ सुखपूर्वक जीवनयापन कर सके।