विमल कुमार सिंह

22. ‘जल परीक्षा’ और उसके बाद

अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार दशहरा की तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। लेकिन हम इसकी परवाह नहीं करते। अंग्रेजी तिथि कुछ भी हो, हमने तय किया है कि हम प्रत्येक विजयदशमी को ही अपनी वर्षगांठ मनाएंगे क्योंकि गत वर्ष इसी दिन मिशन तिरहुतीपुर की औपचारिक शुरुआत हुई थी। जैसे माता-पिता और सगे संबंधियों के लिए …

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21. हमारा किष्किंधा कनेक्शन

आज विजयदशमी के दिन आपको मैं अतीत में 14 वर्ष पीछे ले चलता हूं। यह बात वर्ष 2007 की है, तब मैं गोविन्दजी के साथ सुदूर दक्षिण किष्किंधा गया था। हम वहां बसवराज पाटिल जी, सेडम के बुलावे पर गए थे। उद्देश्य था कि पंपा सरोवर के पवित्र तट पर बैठकर आगे की दशा-दिशा तय …

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20. स्टडी सेन्टर नए रूप में

जून, 2021 की शुरुआत में मिशन तिरहुतीपुर का डेढ़ एकड़ का मैदान लगभग उजाड़ पड़ा हुआ था। उसमें न तो कोई बाऊंड्री थी और न ही कोई छत। बरसात के मौसम में वहां बच्चों को बुलाकर पढ़ाना असंभव सा था। गांव के भीतर बच्चों को जुटाने का विकल्प बरसात के कारण पहले ही खत्म हो …

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19. जब अभिशाप वरदान हो गया

द्यूत क्रीड़ा के बाद जब पांडवों को वनवास मिला तो भविष्य में युद्ध को अवश्यंभावी मानकर अर्जुन ने विभिन्न प्रकार के दिव्यास्त्रों की प्राप्ति के लिए प्रयास शुरू कर दिया था। इसी सिलसिले में वे इन्द्र के पास भी गए। लेकिन वहां एक अनहोनी हो गई। कुछ ऐसी बात हुई कि उर्वशी नामक अप्सरा ने …

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18. चुनाव की आंच

शिक्षा के क्षेत्र में देश-विदेश में जो भी अच्छे प्रयोग हुए हैं, उन्हें जानने-समझने में मेरी बहुत रुचि है। अगर मौका मिले तो मैं उन्हें देखने भी जाता हूं। मेरी ऐसी ही एक यात्रा जनवरी महीने में हैदराबाद की हुई जहां अक्षर वनम् नामक एक संस्था ने बच्चों की शिक्षा को लेकर कई अनोखे प्रयोग …

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17. स्टडी सेंटर का प्रयोग

मिशन तिरहुतीपुर की गतिविधियों के कुल 9 आयाम हैं- मीडिया, इवेंट्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर, संगठन, शिक्षा, कृषि, गैर कृषि उत्पादन, व्यापार और सेवाक्षेत्र। इनमें से कोई यदि मुझसे पूछे कि सबसे महत्वपूर्ण क्या है तो मैं कहूंगा शिक्षा और वह भी शैशवकालीन शिक्षा अर्थात शिशु के जन्म से लेकर 5 साल तक दी जाने वाली शिक्षा।  शिशु …

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16. दो अनोखे ‘इवेन्ट्स’

मैं इवेन्ट मैनेजमेन्ट कैसा कर सकता हूं, इसका उत्तर मुझे पहली बार कोल्हापुर, महाराष्ट्र में मिला। दरअसल जनवरी 2015 में भारत विकास संगम का चौथा महासम्मेलन यहां के सुप्रसिद्ध कनेरी मठ में आयोजित होने वाला था। मठ के बारे में एक किताब लिखने के उद्देश्य से मैं एक महीना पहले वहां चला गया था। यद्यपि …

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15. ‘फॉग आफ वार’ से निकासी

मानव सभ्यता की दशा और दिशा तय करने में युद्धों की बड़ी भूमिका रही है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि गीता के उपदेश किसी गुरुकुल में नहीं बल्कि युद्ध के मैदान में दिए गए थे। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन का मोह वास्तव में फॉग आफ वार का ही एक रूप था। अर्जुन को उससे …

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14. ‘फॉग आफ वार’ के बीच

कानपुर से निकलकर मैं और कमल एक रात अयोध्या रुके और फिर अगले दिन 30 नवंबर को गांव पहुंच गए। इस बार गांव से लंबा रुकना था। जिन योजनाओं को तैयार करने में कई वर्ष लगे थे, उन्हें अब जमीन पर उतारने का समय आ गया था। मैंने महसूस किया कि मैं एक समाजसेवी की …

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13. तकनीक का साइड इफेक्ट

दिल्ली में हमने जो खरीददारी की थी उसमें एक बोरी पोलीएस्टर ग्रैन्यूल्स, फाइबर ग्लास मेस और बब्बल रैप के बंडल, बच्चों के लिए ढेर सारे खिलौने और ऐसे ही कई दूसरी चीजें थीं। सबको हमने किसी तरह कार में ठूंसा और गांव जाने के लिए तैयार हो गए। 25 नवंबर को मेरा एकादशी का व्रत …

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